साँप! ( अज्ञेय | सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)
March 7~ Its' birth anniversary of noted litterateur S.H.Vatsyayana Agyeya. Sharing a poem penned by him साँप! ( अज्ञेय | सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) तुम सभ्य तो हुए नहीं नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया। एक बात पूछूँ- (उत्तर दोगे?) तब कैसे सीखा डँसना- विष कहाँ पाया? - अज्ञेय